भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास ने थर्मल साइंस में शोध और विकास के लिए एक सहयोगी केंद्र स्थापित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of understanding) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य भारत के अंतरिक्ष मिशनों में शामिल विभिन्न थर्मल चुनौतियों का समाधान करना और डिजाइन, विश्लेषण और परीक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करना है। यह एक बहुत ही रोमांचक और महत्वपूर्ण सहयोग है! आइए इस सहयोग के बारे में विस्तार से जानते हैं:

इस केंद्र का अनुसंधान मुख्य रूप से निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित होगा:
- अंतरिक्ष यान का थर्मल प्रबंधन: अंतरिक्ष यानों के थर्मल नियंत्रण के लिए नवीनतम तकनीकों का विकास।
- हाइब्रिड रॉकेट्स में दहन अस्थिरता: हाइब्रिड रॉकेट्स के प्रदर्शन में सुधार के लिए दहन अस्थिरता का अध्ययन।
- क्रायो–टैंक थर्मोडायनेमिक्स: क्रायोजेनिक ईंधनों के भंडारण और प्रबंधन में सुधार के लिए नए थर्मोडायनेमिक्स मॉडल और तकनीकों का विकास।
थर्मल साइंस क्या है?
थर्मल साइंस (Thermal Science) एक वैज्ञानिक क्षेत्र है जो तापमान, ऊष्मा (HEAT) और ऊर्जा के रूपांतरण के अध्ययन पर आधारित है। यह विज्ञान ऊष्मा की उत्पत्ति, संचरण और इसके प्रभाव को समझने में मदद करता है। इसमें थर्मोडायनामिक्स, हीट ट्रांसफर, और फ्लूइड मेकानिक्स जैसे सिद्धांत शामिल होते हैं, जो ऊर्जा को एक रूप से दूसरे में बदलने और तापमान को नियंत्रित करने के विभिन्न तरीकों को समझने में सहायक होते हैं।अंतरिक्ष विज्ञान, इंजीनियरिंग, और कई अन्य तकनीकी क्षेत्रों में थर्मल साइंस का महत्वपूर्ण योगदान है
क्या है ISRO का योगदान?
इस केंद्र को स्थापित करने के लिए ISRO ने आरंभिक रूप से ₹1.84 करोड़ की धनराशि प्रदान की है। यह धनराशि वैज्ञानिको को आवश्यक संसाधन और उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायता करेगी, जिससे अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
IIT मद्रास और इसरो ISRO: साझेदारी का उद्देश्य और महत्व :
1.अंतरिक्ष यान की सुरक्षा: यह नया केंद्र थर्मल साइंस के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा. शोधकर्ताओं का मानना है कि थर्मल नियंत्रण के अत्याधुनिक तरीकों जैसे रेडिएटिव कूलिंग, कंडक्टिव हीट ट्रांसफर और फेज चेंज मटेरियल्स के उपयोग से रॉकेट और सैटेलाइट की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है। अंतरिक्ष यान के अंदर के उपकरणों को सही तरीके से काम करने के लिए एक स्थिर तापमान की आवश्यकता होती है। थर्मल साइंस का उपयोग करके, वैज्ञानिक यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अंतरिक्ष यान के अंदर का तापमान हमेशा सही रहे।
2.अंतरिक्ष मिशन की सफलता: अंतरिक्ष मिशन का सफल होना यह हर देश के गौरव, प्रतिष्ठा और उस देश का प्रगति स्तर निश्चित करता है इसलिए एक अंतरिक्ष मिशन की सफलता बहुत महत्वपूर्ण है। अंतरिक्ष मिशन की सफलता एक जटिल प्रक्रिया है अगर अंतरिक्ष यान बहुत गर्म या बहुत ठंडा हो जाता है, तो वहापर निश्चित किये गए पैरामीटर, तकनिकी सेटिंग बिगड़ सकती है और मिशन विफल हो सकता है यही कारण है की अंतरिक्ष सफलता में थर्मल प्रबंधन महत्वपूर्ण है
3.भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान को बढ़ावा देना: इस सहयोग से भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने की उम्मीद है। यह सहयोग नई तकनीकों और नवाचारों को जन्म दे सकता है जो भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में एक वैश्विक नेता बना सकते हैं,इसके साथ ही इसरो के इंजीनियरों और IIT मद्रास के वैज्ञानिकों के बीच साझेदारी से देश में उच्च-स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे इसरो की अंतरिक्ष क्षमताओं में वृद्धि होगी।
इस सहयोग से क्या अपेक्षित लाभ और क्या संभावनाएं हैं ?
1.नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यान: इस सहयोग से वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता में वृद्धि होगी और नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यान होंगे जो अधिक प्रभावशाली और विश्वसनीय होंगे। यह सहयोग भारत को वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अनुसंधान में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। भारत के लिए यह सबसे बड़ा गौरव होगा
2.अंतरिक्ष मिशनों की विस्तृत श्रृंखला: अंतरिक्ष मिशनों की विस्तृत श्रृंखला: भारत ने इससे पहले भी कई अंतरिक्ष सफल प्रयोग किये है भारत अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष मिशनों को अंजाम दे सकता है, जैसे कि मंगल पर मिशन या चंद्रमा पर मानवयुक्त मिशन। इस सहयोग से आनेवाली दिनों में इससे भी बड़े और महत्वपूर्ण मिशन पुरे हो जाऐंगे
3.अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता: इसरो (ISRO) को किसी भी मिशन के लिए अत्याधुनिक तकनीकों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। यह भारत के आत्मनिर्भरता लक्ष्य के अनुरूप है भारत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बन सकता है और अन्य देशों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी बेच सकता है।
ISRO और IIT मद्रास का यह संयुक्त प्रयास न केवल थर्मल साइंस के क्षेत्र में नई खोजों को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि यह भारत के अंतरिक्ष मिशनों के भविष्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में भी सहायक सिद्ध होगा। यह सहयोग अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत को दर्शाता है और भारत को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इसरो और आईआईटी मद्रास का यह प्रयास निस्संदेह भारत के वैज्ञानिक समुदाय और आम जनता के लिए प्रेरणादायक है। इस तरह के कदमों से देश को नई उड़ान भरने में मदद मिलेगी और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में नयी बुलंदियों को हासिल किया जा सकेगा।
आप इस सहयोग के बारे में क्या सोचते हैं? 😊
Ebook Bundle
IIT, JEE & NEET Preparation Materials